क्या सुमित को बचाया जा सकता था ?


आज एक खबर आई कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के चंडीगढ़ दौरे के दौरान चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की वजह से सुमित वर्मा नाम के एक मरीज की मौत हो गई। वो मरीज डायलीसीस पर था, और उसे तत्काल इलाज की जरूरत थी। लेकिन सुरक्षा व्यवस्था की वजह से लगे जाम से वो निजात नहीं पा सका, और उसके परिजन उसे अस्पताल तक नहीं ले जा सके। इस तरह उसे समय पर इलाज नहीं मिल पाया और इलाज में देरी की वजह से उसका हार्ट फेल हो गया। हैरानी की बात ये है कि पीजीआई चंडीगढ़ में प्रधानमंत्री को आज ही कार्डियेक सेंटर का भी उद्घाटन करना था। दिल के इलाज के लिए सेंटर का उद्घाटन और उसी समय अस्पताल के बाहर ही दिल की बीमारी से मरीज की मौत से मृतक के परिजन भी नाराज हैं। इस खबर को सुनने के बाद कई सवाल खड़े होते है कि क्या इस मौत के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जिम्मेदार हैं या फिर उनकी सुरक्षा में तैनात अधिकारी। क्या प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए इलाके की सुरक्षा इतनी कड़ी करनी चाहिए थी कि पीजीआई के आसपास जाम लग गया। आखिर सुमित वर्मा की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है.....व्यक्तिविशेष या व्यवस्था......जाहिर सी बात है कि इस मौत पर प्रधानमंत्री ने अफसोस जताया होगा, लेकिन कोई सात्वना सुमित वर्मा के परिवार की खुशियां वापस ला पाएगी। क्या कोई इस बात की गारंटी देगा कि फिर से किसी खास के कारण किसी आम की जान नहीं जा पाएगी। खैर ये जिदगी ऐसे ही चलती रहेगी, सुमित के बाद प्रधानमंत्री के कार्यक्रम पर कोई असर नहीं पड़ा। मनमोहन सिंह पीजीआई में दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने कार्डियेक सेंटर का उद्घाटन किया। पीजीआई के बाद प्रधानमंत्री पंजाब यूनिवर्सिटी पहुंचे। यहां उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री को यहां एक मल्टीपर्पज हॉल का शिलान्यास भी किया। प्रधानमंत्री बनने के बाद मनमोहन सिंह पहली बार पंजाब यूनिवर्सिटी गये हैं। पीएम ने उन्नीस सौ चौवन में पंजाब वि·ाविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए किया था। और उसके बाद सत्तावन से पैंसठ तक उन्होंने यहां अध्यापन भी किया। प्रधानमंत्री के चंडीगढ़ पहुंचने पर हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों ने उनका स्वागत किया।